महामूर्ख फेसबुक पेज से
आजाद इंडिया में जब संविधान निर्माण की सुगबुगाहट होनी शुरू हुई तब से ही संविधान निर्माण और बीआर आंबेडकर जी के खिलाफ माहौल बनाना शुरू हों गया था वे मनुस्मृति आधारित संविधान लागू करना चाहते थे इसलिए ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन आंबेडकर और नेहरू का भी काफी विरोध हुआ बाकायदा ऑब्जर्वर में उनके खिलाफ लेख छपा हिंदुत्ववादी (ब्राह्मणवादी) साधु-संतों, प्रेस तथा लोगों ने एक मुहिम चलाई लेकिन यह सिलसिला खत्म नहीं हुआ बल्कि आज भी जारी है धर्मभीरु दक्षिणपंथी फासीवादी ताकतें उस समय से आज तक उसका नेतृत्व कररही आज वे संविधान को ऊपर से मानने का दावा करती लेकिन भीतर से उसके बिल्कुल विपरीत आचरण कररही है बाबाओं की धर्म संसद व संविधान और कानून से रोजी-रोटी पाने वाले व्यक्ति भी जो कल तक बाबासाहेब को नमन करते थे वे भी आज उनके खिलाफ मुहिम चला रहे है संविधान की उद्देशिका व उसके प्रावधान अपने मन्तव्य अनुरूप न होने से तिलमिलाए ये लोग लगातार उसपर हमलावर रहे हर बार संविधान को बदलने की बातें दोहराते रहे आरक्षण को गरियाते रहे साथ ही संविधान शिल्पी और वंचित वर्गों के आइकॉन बाबासाहेब आंबेडकर जी की प्रतिमा को तोड़ते रहे एक तरफ मूर्ति बनती है दूसरी ओर तोड़ी जाती यानि संविधान और संविधान रचिता से नफरत के सारे हथकंडे अपनाए गए सबकुछ करने के बाद भी उन्हे कुछ नहीं सुझा तो 75 साल के बाद आज अचानक से नए संविधान निर्माता बीएन राऊ को ले आए है नए तथ्य बनाए जा रहे कल तक जिस संविधान, आरक्षण तथा बाबासाहेब को गाली दे रहे थे वे आज संविधान को प्यार करेंगे मगर बाबासाहेब और आरक्षण को गाली देते रहेंगे EWS अब सामाजिक, आर्थिक तथा राष्ट्रप्रगति का कदम बन गया इस तरह से बाबासाहेब का नाम मिटाने चले है मौजूद वक़्त में ये ताकते दुगुनी रफ्तार से सक्रिय हों रही हमने समझना होगा कि भले ही ये एक प्रोपोगेंडा के तहत किया जा रहा लेकिन हम इस प्रोपोगेंडा को नज़र-अंदाज नहीं कर सकते क्योंकि ये षडयंत्रवादी लोग इस तरह पहले धीरे से शुरुआत करते है फिर देखते कि कोई तगड़ा विरोध नहीं हों रहा तो इनकी वैचारिक मनु जमातें अपने झूठ को सच में तब्दील कर उसे स्थापित करदेती यही अतीत में हमारे महापुरुषों के साथ हुआ उस समय हमारा समाज अनपढ़ और अक्षम था इसलिए जैसा उन्होंने स्थापित किया वैसा स्वीकार करलिया है जैसे कि संत कबीर जी को ब्राह्मण माँ का नाजायज पुत्र व गुरु रैदास जी को पूर्वजन्म के ब्राह्मण माँ का पुत्र आदि उन्हीके चित्रकारों ने कालांतर में उनको काशी नरेश दरबार में छाती चीरते हुए सोने के जनेऊ वाले चित्र बना दिए जो कई घरों में आज भी टंगे हुए पुनश्च इन झूठी और नफरती बातों को गंभीरता से लेकर उसका विरोध दर्ज करवाना आवश्यक है कारण कि झूठ को भले आप इग्नोर करें लेकिन यदि वह हर बार दोहराया जाए उसे सत्ता और धर्म का प्रश्रय मिलता रहे तो कालांतर में वे सच मान ली जाती हर मोर्चे पर इसका जवाब जरूरी अपनी बात को दर्ज करवाने का सबसे ठोस तरीका तथ्यों के साथ उसे लिखित और साहित्यिक रूप देना है…!
– ग्लोबल आंबेडकर








